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शासकीय कर्मचारियों को नहीं मिला कोविड के इलाज का क्लेम, मरीजों का इलाज करते हुए खुद हुए थे संक्रमित

कोरोना एक बार फिर से छत्‍तीसगढ़ में अपना पैर पसारता दिखाई दे रहा है। वहीं, दूसरी ओर कोविड की पिछली लहर में संक्रमितों की सेवा करते हुए स्वयं संक्रमित हो जाने और अपने खर्च पर निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले प्रदेश के 123 शासकीय कर्मचारियों को अब तक शासन की ओर से प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं किया गया है।

स्थिति यह है कि बिल के साथ आवेदन देने के बाद भी किसी प्रकार की पहल नहीं की जा रही है। इससे निराशा है। पीड़ित ऐसे शासकीय कर्मचारी बीते कई दिनों से प्रतिपूर्ति के बिलों के भुगतान के लिए अपने कार्यालयों और अस्पताल के अफसरों के चक्कर लगा रहे हैं। इलाज का प्रमाण देने के बाद भी उनके बिलों को पास नहीं किया जा रहा है। कई कर्मचारियों का आरोप है कि बिल पास करने में आनाकानी और आपत्तियां भी लगाई जा रही हैं। उनका निदान करने के बाद भी बिल अटकाकर रखा गया है।

जानिए क्या है प्रक्रिया

नियमानुसार शासकीय कर्मचारी या अधिकारी इलाज के बाद प्रतिपूर्ति राशि के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद जिला अस्पताल प्रशासन उन बिलों को प्रमाणित करता है। उसके बाद ही संबंधित विभाग में बिल जमा होने पर उसका भुगतान संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के खाते में किया जाता है।

मीनाक्षी लहरे (परिवर्तित नाम) शिक्षक वर्ग-01 ने करोना काल में दिनांक 11 मार्च 2021 से 13 मार्च 2021 तक निजी हास्पिटल तेलीबांधा रायपुर में इलाज कराया था। इसका चिकित्सा प्रतिपूर्ति देयक विभाग को समय पूर्व आवेदन में दिया जा चुका है, लेकिन लगभग दो वर्ष के बाद भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति राशि स्वीकृत नहीं की गई है।

विजय कुमार साहू (परिवर्तित नाम) पटवारी द्वारा करोना काल में दिनांक 11 मई 2020 से 15 मई 2020 तक रायपुर के सड्डू स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज कराया था। इसका चिकित्सा प्रतिपूर्ति देयक विभाग को समय पूर्व आवेदन दिया जा चुका है, लेकिन लगभग तीन वर्ष के बाद भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति राशि अप्राप्त है।

रायपुर कलेक्टर डा सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने कहा, चिकित्सा प्रतिपूर्ति लंबित होने की शिकायतें सुनने को मिली हैं। सभी अधिकारी-कर्मचारियों के मूल विभागाध्यक्षों को लंबित बिलों का भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सुविधाओं का लाभ दिया जा सके।

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